Sunday, 6 October 2013

For youth



केटरिंग से खिलाड़ी तक


बहुंत से ऐसे लोग हैं, जो अभावों में भी अपना रास्ता खोज लेते हैं।
ये भी एक तरह के आदर्श हैं, हमारे समाज के लिये...हमारे युवाओं के लिये।




जुगाड़ की नाव



तकनीक सिर्फ पढ़े—लिखे लोगों की मुहताज नहीं है।
बहुंत से ऐसे लोग हैं, जो अभावों में भी अपना रास्ता खोज लेते हैं।



Thursday, 22 August 2013

आज का इतिहास 22 अगस्त

दक्षिण भारत के शहर मद्रास से ही ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपने विस्तार की नींव रखी थी. जानते हैं क्या हुआ था आज के दिन?
ईस्ट इंडिया कंपनी के आने से पहले मद्रास महत्त्वपूर्ण राजवंशों पल्लव, चोल, पांड्य और विजयनगर की प्रशासनिक, सैनिक और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र हुआ करता था. 22 अगस्त 1639 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से कोरोमंडल तट चंद्रगिरी में कुछ जमीन खरीदी. वेंकट राय ने अंग्रेजी व्यापारियों को यहां एक फैक्ट्री और गोदाम बनाने की अनुमति दी थी. एक साल बाद ब्रिटिश व्यापारियों ने यहां सेंट जॉर्ज किला बनवाया जो औपनिवेशिक गतिविधियों का गढ़ बना.
1746 में मद्रास और सेंट जॉर्ज के किले पर फ्रांसीसी फौजों ने अपना कब्जा जमा लिया जिसे बाद में ब्रितानी कंपनी ने 1749 में एक्स ला शापेल सन्धि के तहत हासिल कर लिया. अगले तीस सालों में ब्रिटिशों को और भी हमलों से जूझना पड़ा जिसमें मैसूर के राजा हैदर अली से भी अपने इलाके को बचाना शामिल था. अठारहवीं सदी के अंत तक ब्रिटिशों ने सेंट जॉर्ज और आसपास के इलाके का विस्तार कर लगभग पूरे आधुनिक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक को अपने अधीन कर लिया. इसके साथ ही उन्होंने मद्रास प्रेसिडेंसी की स्थापना की और मद्रास को यहां की राजधानी घोषित किया. भारत में ब्रिटिशकाल के दौरान मद्रास एक आधुनिक शहर और महत्त्वपूर्ण बंदरगाह के रूप में विकसित हुआ.
मद्रास का आधुनिक नाम चेन्नई यहां के एक प्रमुख गांव चेन्नापट्टनम पर आधारित है. माना जाता है कि सेंट जॉर्ज किला मद्रासपट्टनम के पास होने के कारण अग्रेजों ने इसे मद्रास नाम दिया था. 1996 में राज्य सरकार ने मद्रास का नाम बदल कर चेन्नई कर दिया.

आखिर हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है।



नई दिल्ली। केरल तट पर दो भारतीय मछुआरों की हत्या के मामले में चार इतालवी नौसैनिकों ने बयान दर्ज कराने के लिए भारत आने से इंकार कर दिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी [एनआइए] ने इनको बयान देने के लिए समन भेजा था। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए गृह मंत्रलय ने कानून मंत्रलय से राय मांगी है।
चारों नौसैनिक इतालवी जहाज एनरिका लेक्सी पर उस समय सवार थे, जब इनके दो सहयोगी मैसीमिलैनो लातोरे और सल्वाटोर गिरोन ने 15 फरवरी, 2012 को दो भारतीय मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मामले की जांच कर रही एनआइए ने इन चारों को पूछताछ के लिए समन भेजा था। चारों नौसैनिकों ने एनआइए से कहा है कि वे भारत आने के बजाय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेशी को तैयार हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि एनआइए की टीम इटली आकर उनसे पूछताछ कर सकती है या उन्हें सवाल भेज दिए जाएं जिनका वे लिखित में जवाब दे देंगे। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत इटली इस मामले में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है, लिहाजा एनआइए के लिए इनमें कोई भी प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं होगा। इतालवी नौसैनिकों के इंकार से मामले की सुनवाई में और देरी होने की संभावना बढ़ गई है।
ज्ञात हो कि इटली ने तर्क दिया था कि चूंकि यह घटना अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई है, लिहाजा भारतीय अदालतों को इसकी सुनवाई का अधिकार नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इटली के तर्क को खारिज कर दिया था।

एक नजर तालिबानी फरमान पर



एक नजर तालिबानी फरमान पर
जागरण संवाददाता, सोनभद्र। पंचायत एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में है। बभनी क्षेत्र के मचबंधवा गांव की पंचायत ने बुधवार को एक दुष्कर्मी को काशी में गंगा स्नान कर प्रायश्चित करने की सजा सुनाई है।
गांव में सोमवार को एक युवक को दुष्कर्म के आरोप में ग्रामीणों ने पकड़ लिया। मामले को लेकर गांव में पंचायत बैठी। आरोपी को पुलिस के हवाले करने की बजाए पंचायत ने सुझाव दिया कि आरोपी काशी जाए और गंगा में डुबकी लगाकर अपने पापों का प्रायश्चित कर ले।
बात लोगों के गले नहीं उतरी और विरोध शुरू हो गया। मंगलवार को फिर पंचायत बैठी और इस बार दुष्कर्मी युवक पर बकरा-भात का जुर्माना ठोंका गया। इस बार बात मीडिया तक पहुंच गई।
आनन-फानन फिर पंचायत बुलाई गई और युवक पर लगाया गया बकरा भात का जुर्माना वापस ले लिया गया और नया फरमान जारी किया गया कि दुष्कर्मी युवक काशी जाए और गंगा स्नान कर अपना पाप धो ले।